
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने निरीक्षण किया। मस्जिद की दीवारों पर की गई रंगाई-पुताई को लेकर टीम ने बारीकी से जांच की।
निरीक्षण का कारण और उद्देश्य
ASI टीम का यह दौरा मस्जिद की ऐतिहासिक संरचना और दीवारों पर किए गए मरम्मत कार्यों की जांच के लिए किया गया। जानकारी के अनुसार, मस्जिद की दीवारों पर हाल ही में रंगाई-पुताई का कार्य हुआ था, जिससे इसकी मूल संरचना और पुरातनता पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ASI टीम ने क्या कहा?
ASI के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान दीवारों की स्थिति का गहन अध्ययन किया। उन्होंने मस्जिद की दीवारों पर किए गए पेंट और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और सामग्री का आकलन किया।
टीम ने मस्जिद प्रबंधन से भी बात की और जानकारी ली कि रंगाई-पुताई के लिए किन सामग्रियों का उपयोग किया गया है और क्या इस कार्य में एएसआई के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है या नहीं।
जामा मस्जिद की ऐतिहासिकता
संभल की जामा मस्जिद एक प्राचीन धरोहर है और इसका ऐतिहासिक महत्व है। यह मस्जिद स्थापत्य कला और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है। ऐसे में किसी भी प्रकार के मरम्मत कार्य में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
संभल की जामा मस्जिद पर ASI की सख्ती क्यों?
- संरक्षण नियमों का उल्लंघन: पुरातात्विक महत्व वाली इमारतों में बिना अनुमति मरम्मत कार्य करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
- ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण: जामा मस्जिद जैसी धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता में है।
- रंगाई-पुताई से संरचना पर असर: गलत सामग्री का उपयोग मस्जिद की पुरानी दीवारों को नुकसान पहुंचा सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
इस निरीक्षण को लेकर स्थानीय लोगों में हलचल मची हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि मस्जिद के रखरखाव के लिए मरम्मत कार्य आवश्यक था, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि ऐतिहासिक इमारत पर किसी भी कार्य से पहले ASI की अनुमति लेना जरूरी है।









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