
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज विदेश मामलों की संसदीय सलाहकार समिति को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। करीब तीन घंटे तक चली इस अहम बैठक में सांसदों ने विदेश मंत्री से कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया।
विदेश मंत्री से पूछे गए अहम सवाल
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सांसदों ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल किए। इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका की भूमिका और संभावित मध्यस्थता, सिंधु जल समझौता, और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पहलुओं को लेकर प्रश्न शामिल थे। इस पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा आतंकी ठिकानों पर की गई सटीक और निर्णायक कार्रवाई ने पाकिस्तान के मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है।
ऑपरेशन के बाद दी गई थी आधिकारिक जानकारी
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में विदेश मंत्री के एक बयान को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ था, उस पर भी उन्होंने बैठक में सफाई दी। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के पूरा होने के बाद भारत के डीजीएमओ ने पाकिस्तानी डीजीएमओ को औपचारिक जानकारी दी थी, न कि ऑपरेशन शुरू होने से पहले।
अमेरिका ने नहीं की कोई मध्यस्थता: विदेश मंत्री एस. जयशंकर
बैठक के दौरान सांसदों ने विदेश मंत्री से यह जानना चाहा कि क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका ने किसी तरह की मध्यस्थता की कोशिश की थी। इस पर डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका की ओर से कोई मध्यस्थता नहीं की गई। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से जो फोन कॉल आया था, उसमें भारत ने स्पष्ट कर दिया कि बातचीत केवल डीजीएमओ स्तर पर ही होगी, और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होगी।
सिंधु जल समझौता फिलहाल निलंबित: जयशंकर
सिंधु जल समझौते को लेकर भी सांसदों ने सवाल किया कि क्या भारत सरकार इस समझौते को फिर से बहाल करने पर विचार कर रही है। इस पर विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि सिंधु जल समझौता फिलहाल निलंबन में है, और इसे बहाल करने की कोई तत्काल योजना नहीं है।









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