
आयुष्मान भारत योजना में कथित घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड समेत तीन राज्यों में बड़ी कार्रवाई की है। यह योजना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत चलाई जाती है, जिसका उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। लेकिन इस योजना में फर्जीवाड़े की आशंका के चलते ईडी ने जांच शुरू की और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की।
क्या है आयुष्मान भारत स्कीम घोटाला?
आयुष्मान भारत योजना के तहत योग्य परिवारों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है। लेकिन जांच में सामने आया है कि कुछ निजी अस्पतालों और बिचौलियों ने इस योजना का गलत फायदा उठाया। इसमें फर्जी मरीजों का नाम जोड़कर क्लेम लेना, अपात्र लाभार्थियों को शामिल करना और पैसों का गबन करना शामिल है।
ईडी की छापेमारी किन राज्यों में हुई?
ईडी ने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी ने सरकारी अधिकारियों, अस्पतालों और बिचौलियों के ठिकानों पर दस्तावेज जब्त किए हैं। प्राथमिक जांच में करोड़ों रुपये के हेरफेर की बात सामने आई है।
कैसे हुआ घोटाला?
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फर्जी मरीजों के नाम पर बिलिंग – अस्पतालों ने ऐसे लोगों के नाम पर क्लेम किया जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए।
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अपात्र लाभार्थियों को योजना में शामिल करना – कई ऐसे लोग, जो इस योजना के लिए योग्य नहीं थे, उन्हें भी इसका लाभ दिलवाया गया।
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मिलिभगत से फंड डायवर्जन – अस्पतालों, एजेंटों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया।
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फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना – इलाज के नाम पर नकली मेडिकल रिपोर्ट्स और बिलिंग सिस्टम तैयार किए गए।
ईडी की कार्रवाई का असर
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बड़े पैमाने पर दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिससे घोटाले में शामिल लोगों की पहचान हो सकेगी।
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इस मामले में जल्द ही कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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सरकार अब आयुष्मान भारत योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करेगी।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र और राज्य सरकारों ने कहा है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ईडी और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले में पूरी सतर्कता से जांच कर रही हैं।









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